महाराष्ट्र विधानसभा में सना मलिक के बयान पर बवाल, ‘कुरान के कानून’ वाली टिप्पणी पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी विधायक सना मलिक के बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया। बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जबकि सना मलिक ने बयान पर सफाई देते हुए अनुच्छेद 25 का हवाला दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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मुख्य बातें
  • विधानसभा में बयान के बाद हंगामा
  • बीजेपी ने किया विरोध
  • सना मलिक ने दी सफाई
  • UCC और पर्सनल लॉ पर फिर बहस
  • अनुच्छेद 25 का दिया हवाला

मुंबई | The Janpath News

महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी विधायक सना मलिक के एक बयान को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान दिए गए उनके भाषण का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई।

विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में समान नागरिक अधिकार, मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक कानून पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान सना मलिक की टिप्पणी पर सदन में हंगामा हो गया।


क्या कहा सना मलिक ने?

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान सना मलिक ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और कुरान की शिक्षाओं का उल्लेख किया। उनके भाषण के एक हिस्से को लेकर यह दावा किया गया कि उन्होंने भारत में भी कुरान आधारित कानून लागू करने की बात कही।

यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।


बीजेपी ने साधा निशाना

सना मलिक के बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

बीजेपी विधायक दिव्यानी फरांडे ने विधानसभा में कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और देश किसी भी धार्मिक ग्रंथ के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार चलता है।

उन्होंने कहा कि—

“यह नया भारत है। यहां कानून संविधान के अनुसार बनते हैं, किसी धार्मिक ग्रंथ के आधार पर नहीं। महिलाओं को समान अधिकार मिलना चाहिए और ट्रिपल तलाक जैसे कानून इसी उद्देश्य से बनाए गए हैं।”

विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।


सना मलिक ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद सना मलिक ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण जारी किया।

उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है।

सना मलिक के अनुसार—

“मैंने भारत में पाकिस्तान जैसा कानून लागू करने की बात नहीं कही। मैंने केवल संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अपने धर्म का पालन करने और उसके बारे में बोलने के अधिकार की बात कही थी। भारत का संविधान सर्वोच्च है और मैं उसी के अनुसार अपनी बात रख रही थी।”

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का उदाहरण भारत पर लागू नहीं किया जा सकता और उनका ऐसा कोई आशय नहीं था।


पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?

विधानसभा में भाजपा विधायक दिव्यानी फरांडे ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन तलाक कानून और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था।

इसी बहस के दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ, पाकिस्तान के कानून और धार्मिक अधिकारों का जिक्र हुआ, जिसके बाद सना मलिक की टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई।


संविधान बनाम पर्सनल लॉ पर फिर छिड़ी बहस

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code), मुस्लिम पर्सनल लॉ और संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है।

राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।


फिलहाल क्या स्थिति है?

विवादित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वहीं सना मलिक अपने बयान की सफाई दे चुकी हैं।

अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी है, जबकि कानूनी या संवैधानिक स्तर पर कोई नई आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।


जनपथ न्यूज़ की तथ्यात्मक टिप्पणी

यह रिपोर्ट विधानसभा की कार्यवाही, संबंधित नेताओं के सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध वीडियो के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी बयान की संवैधानिक या कानूनी व्याख्या का अंतिम आधार भारत का संविधान और न्यायालयों के निर्णय होंगे।

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