पटना | जनपथ न्यूज़ डिजिटल डेस्क
बिहार की राजनीति में वर्षों तक सत्ता और रणनीति का केंद्र माने जाने वाले 10 सर्कुलर रोड का अध्याय अब बदलता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक प्रभाव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास के रूप में पहचान बना चुका यह बंगला अब खाली कराया जा रहा है।
बिहार सरकार ने इस सरकारी आवास को दूसरे मंत्री के नाम आवंटित कर दिया है। इसके बाद राबड़ी देवी के परिवार द्वारा बंगला खाली करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सरकारी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है और बंगले का हैंडओवर लिया जा रहा है।
हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है, जबकि आरजेडी इसे चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रही है।
क्यों खास है 10 सर्कुलर रोड?
पटना का 10 सर्कुलर रोड सिर्फ एक सरकारी बंगला नहीं रहा, बल्कि लंबे समय तक बिहार की राजनीति का सबसे प्रभावशाली पता माना जाता रहा।
राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह आवास उन्हें आवंटित हुआ और धीरे-धीरे यह लालू परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वर्षों तक इसी पते से—
- चुनावी रणनीतियां तैयार हुईं,
- टिकट वितरण पर मंथन हुआ,
- गठबंधन की बैठकें हुईं,
- और पार्टी के बड़े राजनीतिक फैसले लिए गए।
कैसे बना सत्ता का पावर सेंटर?
साल 1997 में चारा घोटाले के बाद जब लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं, तब उन्हें यह सरकारी आवास मिला।
इसके बाद यह बंगला केवल मुख्यमंत्री आवास नहीं रहा, बल्कि आरजेडी की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।
राजनीतिक हलकों में यह माना जाता रहा कि बिहार की राजनीति से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला इस पते से होकर गुजरता था।
सरकार का क्या कहना है?
बिहार सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है।
सरकारी नियमों के अनुसार, आवास का आवंटन बदलने के बाद संबंधित व्यक्ति को बंगला खाली करना होता है। सरकार का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।
आरजेडी ने उठाए सवाल
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं का कहना है कि इस कार्रवाई की टाइमिंग कई सवाल खड़े करती है।
पार्टी का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी हो सकती है।
हालांकि, इस संबंध में सरकार ने राजनीतिक आरोपों को खारिज किया है।
क्या बदल रही है बिहार की राजनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सरकारी आवास बदलने की घटना नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति का प्रतीक भी हो सकती है।
अब आरजेडी में नई पीढ़ी का नेतृत्व तेजस्वी यादव के हाथों में है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव यह तय करेंगे कि बिहार की राजनीति का नया केंद्र और नई दिशा क्या होगी।
क्या किसी बंगले से खत्म हो जाता है राजनीतिक प्रभाव?
भारतीय राजनीति में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां नेताओं ने सत्ता और सरकारी आवास छोड़े, लेकिन जनता के बीच उनका राजनीतिक प्रभाव बरकरार रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता करती है। हालांकि राजनीतिक प्रतीकों का भी अपना महत्व होता है और 10 सर्कुलर रोड वर्षों तक ऐसा ही एक प्रतीक बना रहा।
निष्कर्ष
10 सर्कुलर रोड अब किसी और मंत्री के हिस्से में जाएगा, लेकिन इस पते का राजनीतिक इतिहास बिहार की राजनीति में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
फिलहाल इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक व्याख्याएं अलग-अलग हैं। एक पक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मान रहा है, जबकि दूसरा इसे चुनावी राजनीति के संदर्भ में देख रहा है। अंतिम राजनीतिक संदेश क्या होगा, इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनावों में जनता देगी।
