वर्ल्ड डेस्क | The Janpath News
मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी बयानबाज़ी ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) को जल्द सामान्य रूप से खोलने का दावा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं करता तो अमेरिका आगे और सख्त कदम उठा सकता है।
ट्रंप ने दावा किया कि यदि सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता पड़ी तो उसका परिणाम ईरान के लिए बेहद गंभीर हो सकता है।
हालांकि, अमेरिका की ओर से इस बयान के बाद किसी नई सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
ईरान का जवाब: हॉर्मुज़ जल्द खुलेगा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को अगले 30 दिनों के भीतर सामान्य रूप से संचालित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
अरागची ने यह भी कहा कि हॉर्मुज़ के संचालन और सुरक्षा का प्रबंधन पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में रहेगा तथा किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
क्या हुआ था हालिया घटनाक्रम?
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों, ड्रोन सुविधाओं और तटीय रडार साइट्स पर हवाई कार्रवाई करने का दावा किया।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई कथित युद्धविराम उल्लंघन के जवाब में की गई थी।
वहीं ईरान ने इन घटनाओं के बाद क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और हॉर्मुज़ को सामान्य स्थिति में लाने की बात दोहराई है।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है।
इसी मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।
यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार का सैन्य तनाव या बाधा उत्पन्न होती है, तो उसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
अगर तनाव बढ़ा तो दुनिया पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है तो इसके कई वैश्विक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं—
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- पेट्रोल और डीजल महंगे होने की संभावना
- महंगाई दर में वृद्धि
- वैश्विक शेयर बाजारों में दबाव
- हवाई यात्रा की लागत बढ़ना
- खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर
- वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा
लेबनान और क्षेत्रीय संघर्ष भी चिंता का कारण
ईरान ने कहा है कि लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में संघर्ष समाप्त होना चाहिए।
हालांकि क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों और लगातार आ रहे राजनीतिक बयानों के कारण तनाव पूरी तरह समाप्त होता नहीं दिख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक वार्ता जारी रहना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
दुनिया की नजर अगले कदम पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या फिर बयानबाज़ी आगे चलकर बड़े सैन्य टकराव का रूप ले सकती है।
आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों के कदम यह तय करेंगे कि मध्य पूर्व में तनाव कम होगा या फिर वैश्विक संकट और गहरा सकता है।
