जंग के बीच भारत का बड़ा कदम: तेल $100 पार, फिर भी LPG–LNG सप्लाई सुरक्षित!

मिडिल ईस्ट तनाव का असर सप्लाई पर , लेकिन भारत ने संभाले हालात, कहीं कमी नही - सुजाता शर्मा

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मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है, लेकिन भारत ने हालात को मजबूती से संभाल लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया कि कच्चे तेल, LPG और LNG की सप्लाई पर असर जरूर पड़ा है, लेकिन देश में किसी तरह की कमी नहीं होने दी गई।

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए हैं। इसके बावजूद भारत सरकार ने समय रहते कई अहम फैसले लिए, जिससे सप्लाई चेन मजबूत बनी रही। फिलहाल देश के पास पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है और अगले दो महीनों की सप्लाई भी पहले से सुनिश्चित है।

LPG और PNG की स्थिति भी नियंत्रण में है। देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता, बल्कि उससे भी ज्यादा पर काम कर रही हैं, जिससे घरेलू LPG उत्पादन में करीब 40% तक बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, भारत अब भी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता, कमर्शियल सप्लाई धीरे-धीरे बहाल

भारत करीब 90% LPG आयात ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ के जरिए करता है। इसी को देखते हुए सरकार ने पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी और कमर्शियल गैस सप्लाई को अस्थायी रूप से सीमित किया। बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया—पहले 20%, फिर 50% और अब 70% तक कर दिया गया है।

14 मार्च से अब तक करीब 30,000 टन कमर्शियल LPG की सप्लाई की जा चुकी है। साथ ही रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता दी गई। मजदूरों को लगभग 30,000 छोटे 5 किलो वाले सिलेंडर भी वितरित किए गए।

अफवाहों से घबराएं नहीं—देश में ईंधन की कोई कमी नहीं

सरकार ने साफ किया कि कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं, लेकिन हकीकत में पेट्रोल, डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। कच्चे तेल की कीमत भले ही $70 से बढ़कर $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हो, लेकिन देश में सप्लाई पूरी तरह स्थिर है।

सबसे अहम बात—जहां कई पड़ोसी देशों में ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सरकार का फोकस साफ है: आम जनता पर बोझ डाले बिना ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना।

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