Sahil Wakode Case: छात्रों के प्रदर्शन के बाद IIT Bombay ने क्यों मांगी माफी? Dean पर भी एक्शन
IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद कैंपस में तीन दिनों तक चले छात्रों के प्रदर्शन के बीच संस्थान ने अपने पहले बयान को लेकर माफी मांगी है। वहीं Professor Suryanarayana Doolla को Dean की जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। छात्र साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
मुंबई स्थित IIT Bombay में छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। छात्रों के लगातार प्रदर्शन के बाद IIT Bombay ने साहिल की मौत को लेकर अपने शुरुआती communication पर माफी मांगी है। संस्थान का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं था।
इसके साथ ही Professor Suryanarayana Doolla को उनकी Dean की प्रशासनिक जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। संस्थान के मुताबिक उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।
IIT Bombay ने क्यों मांगी माफी?
विवाद की एक बड़ी वजह IIT Bombay की ओर से साहिल की मौत के बाद जारी किया गया शुरुआती बयान बना था।
संस्थान ने पहले कहा था कि परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाया गया था और आरोप था कि उन्होंने सवालों के जवाब हासिल करने के लिए प्रश्नपत्र AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया था। हालांकि IIT Bombay ने यह भी कहा था कि साहिल के खिलाफ कोई disciplinary action शुरू नहीं किया गया था।
छात्रों ने साहिल की मौत के बाद इन जानकारियों को सार्वजनिक किए जाने पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे साहिल की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया और संस्थान से माफी की मांग की।
अब IIT Bombay ने माना है कि जब मामले की परिस्थितियां जांच के दायरे में हैं, तब घटनाओं को पहले से किसी तरह characterise करना उचित नहीं था।
Professor Suryanarayana Doolla पर क्या एक्शन हुआ?
साहिल की मौत के बाद Professor Suryanarayana Doolla का नाम भी विवाद के केंद्र में आया। साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में उनका नाम है।
21 सितंबर को IIT Bombay की ओर से बताया गया कि Professor Doolla को Dean की जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उनके खिलाफ किसी आगे की कार्रवाई का फैसला जांच के बाद लिया जाएगा।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सामने आई ताजा जानकारी उनकी Dean की administrative role से suspension से जुड़ी है। उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होगी।
परिवार ने लगाए जातिगत उत्पीड़न के आरोप
साहिल के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है और Professor Doolla का नाम FIR में शामिल है।
हालांकि IIT Bombay ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि साहिल की तरफ से उसके SC/ST Cell या प्रशासन को इस तरह की कोई शिकायत नहीं दी गई थी।
Professor Doolla के समर्थन में IIT Bombay Faculty Forum भी सामने आया है। Forum का कहना है कि Professor Doolla परीक्षा के दौरान संस्थान द्वारा निर्धारित academic procedure के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
परिवार के आरोप और संस्थान का पक्ष अब जांच के दायरे में हैं।
Crime Branch कर रही है जांच
साहिल वाकोड़े की मौत के मामले की जांच Mumbai Police Crime Branch को सौंप दी गई है। जांच में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के साथ-साथ साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों को भी देखा जाना है।
इसलिए साहिल की मौत की वजह और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
तीन दिनों तक चला छात्रों का प्रदर्शन
साहिल की मौत के बाद IIT Bombay परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। लगातार तीन दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद रविवार रात छात्रों और IIT Bombay प्रशासन के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई।
इसके बाद IIT Bombay के Director Professor Shireesh Kedare ने प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से पेश किए गए 18-point charter of demands पर हस्ताक्षर किए।
हालांकि charter पर हस्ताक्षर का अर्थ यह नहीं है कि सभी 18 मांगें तत्काल लागू हो गई हैं। कई मांगों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे फैसला लिया जाना है।
छात्रों की 18 मांगों में क्या है?
छात्रों की प्रमुख मांगों में साहिल वाकोड़े की मौत की स्वतंत्र जांच, Professor Doolla के खिलाफ कार्रवाई और IIT Bombay की ओर से सार्वजनिक माफी शामिल है।
छात्रों ने स्वतंत्र जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर और अंतिम निष्कर्ष 15 अक्टूबर तक सामने लाने की मांग भी की है।
इसके अलावा छात्रों ने professors के लिए Code of Conduct, disciplinary proceedings में बदलाव, decision-making में छात्रों की भागीदारी, बेहतर counselling services और mental-health support की मांग की है।
छात्रों ने institute hospital में 24 घंटे psychiatrist-on-call की व्यवस्था और faculty तथा staff के लिए नियमित mental-health sensitisation programmes की भी मांग रखी है।
Director के इस्तीफे की खबर पर IIT Bombay की सफाई
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर IIT Bombay Director Professor Shireesh Kedare के इस्तीफे को लेकर भी दावे सामने आए।
लेकिन IIT Bombay ने साफ किया है कि Director ने इस्तीफा नहीं दिया है और उनके resignation को लेकर चल रही खबर सही नहीं है।
छात्रों के charter में यह मांग जरूर शामिल है कि निर्धारित सुधार एक महीने के भीतर लागू नहीं किए जाने पर Director और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को पद छोड़ना चाहिए।
18 सितंबर को हुई थी साहिल वाकोड़े की मौत
साहिल वाकोड़े IIT Bombay में second-year BTech student थे। 18 सितंबर को उनकी मौत के बाद परीक्षा से जुड़ी घटना, संस्थान की प्रतिक्रिया और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर सवाल उठने शुरू हुए।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया और जवाबदेही की मांग करते हुए 18 सूत्रीय charter सामने रखा।
अब IIT Bombay ने अपने पहले communication पर माफी मांग ली है और Professor Doolla की Dean की जिम्मेदारी को निलंबित कर दिया गया है। लेकिन इस पूरे मामले के सबसे अहम सवाल—साहिल की मौत से पहले वास्तव में क्या हुआ और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है—इनका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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