गुरुवार, 24 सितंबर 2026
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ब्रिक्स मंच से डॉलर को चुनौती: भारत, रूस और ईरान का नया आर्थिक दांव
अंतरराष्ट्रीय राजनीति

ब्रिक्स मंच से डॉलर को चुनौती: भारत, रूस और ईरान का नया आर्थिक दांव

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के नेताओं के सत्र में वैश्विक अर्थव्यवस्था और डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने व्यापार और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर दिया।

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नई दिल्ली में 11 सितंबर 2026 को आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए एक नई आवाज उठी है। इस मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने व्यापार, सुरक्षित सप्लाई रूट्स और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बड़ा संदेश दिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव और डॉलर का दबदबा

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दशकों से डॉलर का दबदबा बना हुआ है, और अमेरिका की ताकत का सबसे बड़ा हथियार भी डॉलर को ही माना जाता है। लेकिन अब ब्रिक्स के मंच से इस व्यवस्था को चुनौती देने की शुरुआत हो चुकी है, जहां उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं पुरानी आर्थिक ताकतों की जगह ले रही हैं।

व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों के सुरक्षित रहने की वकालत की। उन्होंने नववहन की आजादी और नाविकों की सुरक्षा का समर्थन करते हुए कहा कि:

  • ग्लोबल ट्रेड तभी आगे बढ़ सकता है जब सी-लेन्स (Sea Lanes) सिक्योर हों।
  • सप्लाई रूट्स पूरी तरह ओपन हों और सी-फेअरर्स (Sea-farers) सेफ हों।
  • भारत फ्रीडम ऑफ नेविगेशन और सी-फेअरर्स की सेफ्टी का दृढ़ समर्थक है।

पुरानी आर्थिक व्यवस्था पर सवाल

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव हो रहा है और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं पुरानी आर्थिक ताकतों की जगह ले रही हैं। पुतिन का इशारा उन देशों की तरफ था जिन्होंने लंबे समय तक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर दबदबा बनाए रखा।

स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं के ज्यादा इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने कहा कि कुछ सीमित मुद्राओं पर ज्यादा निर्भरता वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है:

  • सदस्य देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
  • मुद्रा जोखिमों और पारस्परिक समझौतों के प्रबंधन के लिए आवश्यक उपकरण स्थापित किए जाने चाहिए।
  • नया डेवलपमेंट बैंक (NDB) बुनियादी ढांचे और ऊर्जा के वित्तपोषण का प्रमुख इंजन बनना चाहिए।

ब्रिक्स का नया विजन और भारत की भूमिका

ब्रिक्स का यह मंच केवल व्यापारिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बदलती वैश्विक आर्थिक ताकतों की एक नई तस्वीर पेश की है। एक तरफ डॉलर आधारित पुरानी व्यवस्था है, तो दूसरी तरफ ब्रिक्स की नई सोच है जिसमें स्थानीय मुद्राओं और आर्थिक स्वतंत्रता पर जोर है, और इस नई व्यवस्था में भारत का रुपया भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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